ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने शिक्षा, रोजगार, आर्थिक विकास और राजनीतिक भागीदारी को लेकर सरकार से उठाई कई मांगें।
वाराणसी: विश्वकर्मा समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को लेकर ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा ने आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि पारंपरिक शिल्प और तकनीकी कौशल के दम पर देश के निर्माण में अहम योगदान देने वाला समाज आज भी अपेक्षित अवसरों से वंचित है। उन्होंने कहा कि अधिकार, सम्मान और विकास के लिए महासभा लगातार आवाज उठाती रहेगी।
अशोक विश्वकर्मा के मुताबिक समाज के युवाओं को शिक्षा से जोड़ना विकास की पहली सीढ़ी है। इसी उद्देश्य से मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, कोचिंग और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने ‘हर घर से एक अफसर, हर घर से एक इंजीनियर’ अभियान के जरिए युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करने की बात कही।
योजनाओं का लाभ कारीगरों तक पहुंचाने पर जोर…
उन्होंने कहा कि केंद्र की पीएम विश्वकर्मा योजना और उत्तर प्रदेश की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का वास्तविक लाभ पारंपरिक कारीगरों तक पहुंचना जरूरी है। बढ़ई, लोहार, सुनार, ठठेरा और मूर्तिकार जैसे हुनरमंद लोगों के लिए आधुनिक उपकरण, तकनीकी प्रशिक्षण और आसान ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता एवं सहायता शिविर आयोजित किए जाने की जरूरत है।
पलायन रोकने के लिए शिल्प कला बोर्ड और क्लस्टर की मांग…
महासभा ने पारंपरिक कारीगरों के रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर बढ़ते पलायन पर भी चिंता जताई। अशोक विश्वकर्मा ने कहा कि वाराणसी, भदोही, मऊ और आजमगढ़ सहित पूर्वांचल के कई इलाकों में बड़ी संख्या में कारीगर स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने के कारण बाहर जाने को मजबूर हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में शिल्प कला बोर्ड के गठन तथा प्रत्येक जिले में फर्नीचर एवं हस्तशिल्प क्लस्टर स्थापित करने की मांग रखी। उनका कहना है कि इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं तथा पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ा जा सकता है।
सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी का भी उठाया मुद्दा…
विश्वकर्मा समाज के साथ होने वाली कथित उत्पीड़न की घटनाओं का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने पिछड़े वर्गों के लिए प्रभावी कानूनी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की। उन्होंने OBC सुरक्षा कानून बनाने की मांग करते हुए कहा कि समाज को सामाजिक सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।
17 सितंबर को राजकीय अवकाश की मांग…
अशोक विश्वकर्मा ने 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर राजकीय अवकाश घोषित करने की मांग को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यह दिन विश्वकर्मा समाज के लिए आस्था के साथ-साथ सामाजिक पहचान और गौरव से जुड़ा है। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा के जीवन, शिल्प परंपरा और योगदान को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में स्थान देने की भी मांग की।
‘हुनर को तकनीक से जोड़ने पर बनेगा रोजगार का नया मॉडल’…
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि विश्वकर्मा समाज के पास पारंपरिक कौशल और अनुभव की बड़ी पूंजी है। यदि इस हुनर को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाए तो कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राजकीय अवकाश, शिल्प कला बोर्ड और कारीगरों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर महासभा अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेगी। उनका कहना है कि समाज के विकास के लिए शिक्षा, रोजगार, आर्थिक मजबूती और राजनीतिक भागीदारी—चारों मोर्चों पर संगठित प्रयास जरूरी है।








