बुलडोजर शासन और प्रशासन के अत्याचार और अमानवीयता का बना प्रतीक- अशोक विश्वकर्मा

बुलडोजर कार्यवाही के चलते लाखों लोग हुए बेघर, बेरोजगार और भुखमरी के शिकार।

अशोक विश्वकर्मा ने बुलडोजर शासन और प्रशासन के अत्याचार का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्यवाही के चलते लाखों लोग बेघर, बेरोजगार और भुखमरी के शिकार हो गए हैं। उन्होंने इसे अमानवीय और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन बताया है। सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोपी होने के आधार पर किसी का घर नहीं गिराया जा सकता।

वाराणसी: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने एक विज्ञप्ति में बताया है कि देश में हाल के कुछ वर्षों में ‘बुलडोजर’ जैसी मशीन का उपयोग केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अत्यंत विवादास्पद राजनीतिक और कानूनी अत्याचार ,अन्याय और अमानवीयता का प्रतीक बन गया है। शासन और प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्यवाही के चलते देशभर में लाखों लोग बेघर, बेरोजगार और भुखमरी के शिकार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके उपयोग को लेकर समाज का नजरिया सरकार के विपरीत है। जहां एक ओर सरकार समर्थकों का तर्क है कि बुलडोजर कानून-व्यवस्था का प्रतीक है ,सरकार इसे ‘त्वरित न्याय’ और अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ के लिए इस्तेमाल करती हैं। वहीं मानवाधिकार संगठनों और आलोचकों का तर्क है कि यह अत्याचार का प्रतीक है,और यह अमानवीय हैं। इसके पीछे मुख्य वजह कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। किसी व्यक्ति को दोषी साबित किए बिना उसका मकान/दुकान गिराना ‘निर्दोष होने के अनुमान’ के सिद्धांत के खिलाफ है। बुलडोजर कार्यवाही से प्रभावित व्यक्ति सामूहिक सजा का शिकार होता है। परिवार के एक सदस्य के अपराध के लिए पूरे परिवार को बेघर करना मौलिक अधिकारों का हनन है। अक्सर यह आरोप लगता हैं कि इसका इस्तेमाल एक विशेष समुदाय या राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि “केवल आरोपी होने के आधार पर किसी का घर नहीं गिराया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कार्यपालिका स्वयं न्यायाधीश नहीं बन सकती और कानून के शासन में इस तरह की मनमानी की कोई जगह नहीं है। जहाँ एक पक्ष इसे अपराध नियंत्रण का साधन मानता है, वहीं दूसरा पक्ष इसे लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर प्रहार के रूप में देखता है।

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