रात के अंधेरे में सड़कों पर घूमते पशु बन रहे हादसों का खतरा।
पड़ाव/चन्दौली: जिले के प्रमुख और बेहद व्यस्त पड़ाव चौराहे पर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ चौराहे और आसपास के हिस्सों में लंबे समय से बंद पड़ी लाइटें रात के समय अंधेरा बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।
शनिवार तड़के करीब 3 से 4 बजे डीडीयू नगर से वाराणसी की ओर जा रही एक तेज रफ्तार कार अचानक सड़क पर आए आवारा पशु से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पशु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार चालक को हल्की चोटें आईं। राहत की बात यह रही कि हादसा किसी बड़े जान-माल के नुकसान में नहीं बदला।
अंधेरा + आवारा पशु = हादसे का खुला खतरा…
पड़ाव चौराहा दिन-रात भारी यातायात वाला क्षेत्र है। ऐसे में रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने और सड़क पर आवारा पशुओं की मौजूदगी से दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। वाहन चालकों के सामने अचानक पशु आने पर उन्हें संभलने तक का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लाइटें लंबे समय से बंद हैं तो आखिर उनकी मरम्मत कब होगी? सड़क किनारे घूम रहे आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था कब सक्रिय होगी? ये सवाल अब हादसे के बाद और गंभीर हो गए हैं।
हादसा चेतावनी है, इंतजार का बहाना नहीं…
शनिवार तड़के हुई घटना को महज एक सड़क हादसा मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। पड़ाव जैसे व्यस्त चौराहे पर अंधेरे और आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि अगली बार किसी वाहन चालक या राहगीर को इसकी कीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग बंद पड़ी लाइटों और सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं की समस्या पर कब ठोस कार्रवाई करता है, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।








