अशोक विश्वकर्मा का 15 करोड़ समाज को सीधा संदेश: जो 17 सितंबर की सरकारी छुट्टी का शासनादेश लाएगा, वोट सिर्फ उसी को जाएगा।
वाराणसी: चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों द्वारा भगवान विश्वकर्मा और शिल्पकार समाज को महज ‘वोट बैंक’ की तरह इस्तेमाल करने पर विश्वकर्मा समाज में भारी आक्रोश पनप रहा है। ‘ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों पर तीखा जुबानी हमला बोला है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव आते ही भगवान विश्वकर्मा का राजनीतिक पूजन, बड़े-बड़े पोस्टर और सम्मेलनों का दौर शुरू हो जाता है, लेकिन चुनाव बीतते ही 15 करोड़ विश्वकर्मा वंशजों और शिल्पकार समाज को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
“पोस्टर नहीं, अधिकार चाहिए” — 17 सितंबर के सार्वजनिक अवकाश पर घेरा…
अशोक विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा-
”अगर राजनीतिक दलों के मन में भगवान विश्वकर्मा के प्रति सच्चा सम्मान है, तो उत्तर प्रदेश में 17 सितंबर (विश्वकर्मा पूजा) को सार्वजनिक अवकाश घोषित क्यों नहीं किया जाता? जब बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इस पावन अवसर पर अवकाश हो सकता है, तो यूपी में आज तक ऐसा क्यों नहीं हुआ?
उन्होंने आगे कहा कि शिल्पकार समाज अब खोखले वादों में फंसने वाला नहीं है। महासभा का सीधा संदेश है: “हमें पोस्टर नहीं, अधिकार चाहिए। भगवान विश्वकर्मा ने पूरी सृष्टि का निर्माण किया था, किसी राजनीतिक दल का नहीं।
चुनावी हुंकार: “जो छुट्टी का शासनादेश लाएगा, वोट उसी को जाएगा…
महासभा अध्यक्ष ने ऐलान किया कि अब शिल्पकार समाज पूरी तरह से जागरूक हो चुका है। अब केवल बयानबाज़ी या सम्मेलनों से काम नहीं चलेगा। जो राजनीतिक दल या सरकार 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के दिन सार्वजनिक अवकाश का शासनादेश (GO) जारी करेगी, शिल्पकार समाज का समर्थन उसी को मिलेगा।
सियासी दलों द्वारा चलाए जा रहे चुनावी हथकंडों के खिलाफ शिल्पकार समाज में पनप रहा यह जनआक्रोश आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।








