ज्ञानी जैल सिंह विश्वकर्मा समाज के गौरव और सामाजिक पुनर्जागरण के संवाहक – अशोक विश्वकर्मा

जयंती पर याद किए गए सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह।

अशोक विश्वकर्मा ने ज्ञानी जैल सिंह को जयंती पर याद किया है। उन्होंने कहा कि ज्ञानी जैल सिंह विश्वकर्मा समाज के स्वाभिमान और गौरव के प्रतीक तथा सामाजिक पुनर्जागरण केसरी निशान साहिब फहराया। उन्होंने सिख पंथ की मजबूती के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

वाराणसी: ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय ज्ञानी जैल सिंह की 110 वीं जयंती सामाजिक एकता पुनर्जागरण के रूप में जिला कार्यालय पर मनाई गई। इस मौके पर आयोजित सामाजिक एकता पुनर्जागरण संवाद को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा ज्ञानी जैल सिंह विश्वकर्मा समाज के स्वाभिमान और गौरव के प्रतीक तथा सामाजिक पुनर्जागरण के संवाहक हैं। उन्होंने सामाजिक एकजुटता, शिक्षा और संस्कार का संदेश दिया। ज्ञानी जी देश के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और पहले रामगढ़िया सिख राष्ट्रपति थे। देश और समाज के प्रति उनका योगदान बहुआयामी और उल्लेखनीय रहा है। :उन्होंने सामंतवाद और ब्रिटिश शासन के खिलाफ मजबूती से संघर्ष किया,भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें कई वर्षों तक जेल में रहना पड़ा। जिसके चलते उनके नाम का पर्याय जेल सिंह अर्थात जेल का शेर हो गया। उन्होंने भूमि सुधार लागू किए और भूमिहीन मजदूरों के बीच अतिरिक्त भूमि वितरित की, जिसके कारण उन्हें ‘मजदूर मौजा’ की उपाधि मिली। केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत करने और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए काम किया। उन्होंने भारतीय संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता और समानता के मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई। उन्होंने भारतीय डाकघर (संशोधन) विधेयक को रोकने के लिए अपनी पॉकेट वीटो शक्ति का इस्तेमाल किया, जिसे भारतीय राजनीति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। सिख धर्म ग्रंथों की विद्वता के कारण उन्हें ‘ज्ञानी’ की उपाधि मिली, वह गरीबों और वंचितों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध थे और सभी वर्गों के लोगों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव रखते थे।ज्ञानी जैल सिंह को उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, राजनीतिक सूझबूझ और देश की सेवा के प्रति समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा। कार्यक्रम के आरंभ में ज्ञानी जैल सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रदेश अध्यक्ष चंदन विश्वकर्मा, जिला प्रभारी अरविंद कुमार विश्वकर्मा, कोर कमेटी के सदस्य सुरेश विश्वकर्मा, महासचिव प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, विजय विश्वकर्मा,अमित विश्वकर्मा, राजू विश्वकर्मा, भरत विश्वकर्मा, प्रभु विश्वकर्मा, नंदलाल विश्वकर्मा, ब्रिगेडियर सूर्य प्रताप विश्वकर्मा, दारा मौर्य, मोहित विश्वकर्मा, वंश विश्वकर्मा, राम जी, प्रियांशु, हिमांशु, आदि लोग उपस्थित रहे। तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष कैलाश नाथ विश्वकर्मा एवं संचालन दीप विश्वकर्मा ने किया।

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