फर्जी आधार कार्ड, चाइनीज मेंबर्स और हवाला नेटवर्क! चन्दौली पुलिस ने बेनकाब किया अंतरराष्ट्रीय साइबर जाल।
मुगलसराय में ‘बेबी फर्स्ट क्राई’ शोरूम के ऊपर चल रहा था फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर; जोइपर ऐप्स, नकली आधार कार्ड और फर्जी वेबसाइट से जापानी नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर साफ करते थे हाथ।
चन्दौली: उत्तर प्रदेश की चन्दौली पुलिस, स्वाट, सर्विलांस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मुगलसराय क्षेत्र में चल रहे एक बेहद शातिराना अंतरराष्ट्रीय साइबर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कैलाशपुरी स्थित एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल से फर्जी कॉल सेंटर चला रहे 5 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये ठग भारत में बैठकर जापानी भाषा में बात करते थे और जापान के सीधे-साधे बुजुर्गों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की चपत लगा रहे थे।
क्राइम का तरीका: ‘टेक्निकल सपोर्ट’ के नाम पर बुजुर्गों की गाढ़ी कमाई साफ।
पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस सिंडिकेट का जाल बेहद व्यवस्थित और हाई-टेक था।
नालंदा और गया से सीखी जापानी भाषा: गिरफ्तार अभियुक्तों ने बिहार के गया और नालंदा में रहकर बकायदा जापानी भाषा सीखी थी, ताकि वे जापानी नागरिकों से बिना किसी झिझक के उनकी ही भाषा में संवाद कर सकें।
VoIP से जापानी नंबर का चकमा: ठग भारत के किसी सामान्य नंबर के बजाय VoIP (इंटरनेट कॉलिंग सॉफ़्टवेयर) के जरिए कॉलिंग करते थे। पीड़ित के फोन पर जापान का कंट्री कोड (+81) दिखाई देता था, जिससे उन्हें कोई शक नहीं होता था।
नकली आईडी और वेबकैम से निगरानी: जापानी बुजुर्गों को झांसे में लेने के लिए ठग फर्जी पहचान पत्र कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाते थे। हद तो तब हो गई जब ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर वे पीड़ितों का वेबकैम चालू करवा लेते थे, ताकि पीड़ित की हर हरकत पर नजर रखी जा सके।
रिमोट एक्सेस और फर्जी पिन: आरोपियों ने ‘LogMeIn Rescue Console’ नाम की फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल कर पीड़ितों से 6-डिजिट का पिन दर्ज करवाया और ZOIPER5 ऐप के जरिए उनके कंप्यूटर/सिस्टम का पूरा रिमोट एक्सेस ले लिया।
चाइनीज कनेक्शन और हवाला नेटवर्क: बैंकिंग विवरण हासिल करने के बाद, व्हाट्सएप ग्रुप्स और चाइनीज मेंबर्स द्वारा दिए गए म्यूल (म्यूल बैंक अकाउंट) खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर किए जाते थे। जापानी येन (Yen) को हवाला के जरिए भारतीय रुपयों में बदला जाता था।
बनारस के पते पर फर्जी आधार कार्ड: पहचान छिपाने और ठिकाना सुरक्षित रखने के लिए आरोपियों ने वाराणसी के पते पर कूटरचित (फर्जी) आधार कार्ड बनवा रखे थे।
मुगलसराय में छापेमारी, वीडियोग्राफी के साथ लाइव कॉल सेंटर पर रेड…
मुखबिर से सटीक सूचना मिलने के बाद प्रभारी निरीक्षक स्वाट सेल राम जन्म यादव, थानाध्यक्ष मुगलसराय अर्जुन सिंह, सर्विलांस प्रभारी आशीष मिश्रा और साइबर सेल प्रभारी मिर्जा रिजवान बेग की टीम ने कैलाशपुरी स्थित बिल्डिंग में छापा मारा। पुलिस जब अंदर पहुंची तो वहां कंप्यूटर स्क्रीन पर लाइव कॉलिंग चल रही थी और कमरे में जापानी भाषा गूंज रही थी।
पुलिस ने मौके से 9 लाख रुपये की धनराशि बैंक खातों में फ्रीज कराई है और मुख्य गिरोह से जुड़े मास्टरमाइंड और अन्य वांछितों की तलाश में दबिश दे रही है।
बरामदगी का ब्योरा…
पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में साइबर अपराध में प्रयुक्त उपकरण और फर्जी दस्तावेज जब्त किए हैं।
कंप्यूटर सेट: 19 मॉनिटर (Foxin), 20 CPU (Foxin), 19 की-बोर्ड, 18 माउस, 18 हेडफोन
लैपटॉप: 3 (01 HP सिल्वर, 02 Dell ब्लैक)
मोबाइल फोन: 06 (आईफोन 17, वनप्लस, रेडमी, आईक्यू आदि)
नेटवर्किंग डिवाइसेज: 3 वाई-फाई राउटर (जियो व एयरटेल), 1 टीपी-लिंक राउटर, 1 डी-लिंक 8-चैनल स्विच हब।
दस्तावेज: वाराणसी के पते पर बने 05 कूटरचित (फर्जी) आधार कार्ड।
गिरफ्तार अभियुक्तों की सूची…
रौनक सिंह (उम्र 32 वर्ष) – मैनेजर (निवासी: सैदपुर, बेन, नालंदा, बिहार)
रोशन कुमार (उम्र 21 वर्ष) – (निवासी: नया बाईपास, विष्णुपथ, गया, बिहार)
अमन कुमार (उम्र 23 वर्ष) – (निवासी: मंगला बोरिंग, विष्णुपथ, गया, बिहार)
अंकित कुमार (उम्र 25 वर्ष) – (निवासी: नीमडीह, रूपौ, नवादा, बिहार)
विकास वैभव (उम्र 25 वर्ष) – (निवासी: रामशिला, कोतवाली, गया, बिहार)
मुगलसराय थाने में गंभीर धाराओं में मामला दर्ज…
घटना के संदर्भ में थाना मुगलसराय में मु0अ0सं0 510/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5), 61(2), 318(4), 319(2), 336(3), 337, 338, 339, 340(2), 341(1) और IT एक्ट की धारा 66C व 66D में मामला पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह शुरुआती बरामदगी है। फॉरेंसिक जांच और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद ठगी के आंकड़े में और बड़ा खुलासा हो सकता है।








