मछुआरों की चमकेगी किस्मत! गंगा में छोड़ी जाएंगी 1 लाख चिताला, बढ़ेगी कमाई और पौष्टिक आहार वाराणसी में ‘योगी किला’ तैयार! रोहनिया में CM के आगमन से पहले छावनी में बदला इलाका, छतों पर स्नाइपर्स और चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर वडनगर से काशी तक उफान पर ‘सेवा संकल्प’, 7 अक्टूबर को जगतपुर में भाजपा का महाशक्ति प्रदर्शन काशी में साइलेंट किलर बनी जर्जर बिजली व्यवस्था! सुजाबाद में गाड़ी छुते ही तड़प-तड़पकर चालक की मौत, परिजनों में कोहराम नशे के सौदागरों पर सोनभद्र पुलिस का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: फ्रोंक्स कार से गांजा तस्करी कर रहा आरोपी गिरफ्तार, ₹15 लाख की संपत्ति सीज रात के अंधेरे में हाईवे पर चल रहा था ‘तेल का खेल’, पुलिस की इस एक चाल से खाली हाथ रह गए शातिर, भेजे गए जेल

मछुआरों की चमकेगी किस्मत! गंगा में छोड़ी जाएंगी 1 लाख चिताला, बढ़ेगी कमाई और पौष्टिक आहार

निषाद समाज के लिए खुशखबरी: गंगा में चिताला का कुनबा बढ़ाएगी योगी सरकार, आजीविका को मिलेगा संबल।

​वाराणसी: मोक्षदायिनी माँ गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को नया जीवन देने और उत्तर प्रदेश की राज्यमीन ‘चिताला’ के कुनबे को बढ़ाने के लिए योगी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर आगामी 8 अक्टूबर को एक भव्य ‘रिवर रैंचिंग’ (River Ranching) कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत गंगा नदी में एक लाख चिताला मछली की अंगुलिकाएं (फिंगरलिंग्स) छोड़ी जाएंगी।

​मत्स्य विभाग के अनुसार, इस मुहिम का सीधा मकसद नदी के जलीय खाद्य तंत्र को मजबूत करना, लुप्तप्राय होती प्रजातियों को संरक्षण देना और स्थानीय मछुआरों की आर्थिक स्थिति को संबल प्रदान करना है।

​क्या है ‘रिवर रैंचिंग’ और क्यों पड़ी इसकी जरूरत???
​नदियों में बढ़ते प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण जल-जीवों की प्राकृतिक प्रजनन दर पर असर पड़ा है। ‘रिवर रैंचिंग’ वह वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके ज़रिए नियंत्रित वातावरण में तैयार किए गए मछली के बीजों या बच्चों को प्राकृतिक नदियों में छोड़ा जाता है।

​मत्स्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर सुरेश कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया से –

​प्राकृतिक संतुलन: नदी के भीतर विभिन्न जलीय जीवों के बीच प्राकृतिक तालमेल बैठता है।

​खाद्य शृंखला में मजबूती: चिताला जैसी शिकारी और पारिस्थितिकी-अनुकूल मछलियाँ इकोसिस्टम को साफ और संतुलित रखने में मददगार साबित होती हैं।

​पौष्टिक आहार: स्थानीय आबादी को उच्च प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।

​मछुआरों की चमकेगी किस्मत, आजीविका को मिलेगा बढ़ावा…
​योगी सरकार की यह पहल सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा फायदा गंगा किनारे रहने वाले निषाद और मछुआरा समुदाय को मिलेगा। चिताला की तादाद बढ़ने से आने वाले समय में नदी में मत्स्य संपदा में इजाफा होगा, जिससे स्थानीय मछुआरों की आय के नए स्रोत खुलेंगे।

​अस्सी घाट पर जुटेंगे कई बड़े अधिकारी…
​8 अक्टूबर को होने वाले इस भव्य आयोजन में शासन और विभाग के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी रहेगी। कार्यक्रम में मत्स्य विभाग के विशेष सचिव सुनील कुमार वर्मा, संयुक्त निदेशक (JD) अनिल कुमार और उपनिदेशक (प्लानिंग) समेत कई प्रमुख अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।

​गंगा की निर्मलता और इसके जलीय जीवों का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। चिताला जैसी राज्यमीन का संवर्धन गंगा के प्राकृतिक वैभव को लौटाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
— मत्स्य विभाग

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