बुद्ध जयंती शांति, अहिंसा और करूणा का देता है संदेश- अशोक विश्वकर्मा

अशोक विश्वकर्मा ने बुद्ध जयंती पर तथागत बुद्ध को नमन किया है। उन्होंने कहा कि यह दिन शांति, प्रेम, करुणा और अहिंसा के संदेशों को याद करने और उन्हें जीवन में उतारने का दिन है। बुद्ध जयंती त्रिविध पावन दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि यह दिन प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने और करुणा का भाव रखने की प्रेरणा देता है।

वाराणसी: ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने वैशाख पूर्णिमा बुद्ध जयंती पर तथागत बुद्ध को नमन करते हुए कहां है कि गौतम बुद्ध की जयंती, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का त्रिविध पावन पर्व है। उन्होंने कहा यह दिन बुद्ध के शांति, प्रेम, करुणा और अहिंसा के संदेशों को याद करने और उन्हें जीवन में उतारने का दिन है। वैशाख पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह दिन शांति, अहिंसा, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। तथा आध्यात्मिक जागृति और बुद्ध के मध्यम मार्ग को अपनाने का विशेष अवसर माना जाता है। बुद्ध जयंती त्रिविध पावन दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि माना जाता है कि गौतम बुद्ध का जन्म (लुंबिनी), ज्ञान प्राप्ति (बोधगया) और महापरिनिर्वाण (कुशीनगर) तीनों वैशाख पूर्णिमा को ही हुए थे। इसी दिन भगवान बुद्ध को सुजाता द्वारा खीर खिलाने की याद में खीर का प्रसाद बांटा जाता है, जो तृप्ति और मध्य मार्ग का प्रतीक है।
बुद्ध पूर्णिमा हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने और करुणा का भाव रखने की प्रेरणा देती है।

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