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संत रविदास ने समानता का दिया संदेश- अशोक विश्वकर्मा

व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से बनते हैं महान, पवित्र मन वाले हृदय में ईश्वर करते है निवास

संत रविदास जी की जयंती पर ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समानता, प्रेम और निर्गुण भक्ति का संदेश दिया। वे जाति-व्यवस्था, छुआछूत और सामाजिक असमानता के विरोधी थे, उनकी वाणी और भजन ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में संकलित हैं।

वाराणसी: ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने संत रविदास जी की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित की। उन्होंने कहा कि संत रविदास भक्ति काल के महान संत, कवि और समाज सुधारक थे, उन्होंने समानता, प्रेम और निर्गुण भक्ति का संदेश दिया। काशी में जन्मे और मोची का काम करने वाले संत रविदास ने ऊँच-नीच, जाति-भेद और आडंबरों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने जाति-व्यवस्था, छुआछूत और सामाजिक असमानता का प्रबल विरोध किया और समानता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं, व्यक्ति जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान बनता है। वह निर्गुण भक्ति के अनुयायी थे और आडंबरों के बजाय मन की शुद्धता को ही असली पूजा मानते थे। उनकी वाणी और भजनों को ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में सम्मानित स्थान प्राप्त है। संत रविदास कबीर के समकालीन थे,और मीराबाई के गुरु के रूप में भी जाने जाते हैं।
‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’: यह उनकी सबसे प्रसिद्ध उक्ति है, जो यह दर्शाती है कि यदि मन पवित्र है, तो ईश्वर हृदय में ही निवास करते हैं। इन्होंने रविदासिया पंथ की स्थापना की गुरु ग्रंथ साहिब में इनके 41 पद हैं जो उनके ही 16 रागों में संकलित हैं। संत शिरोमणि रविदास जी एक महान संत के रूप में आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

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