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देव शिल्पी त्वष्टा विश्वकर्मा का प्राकट्योत्सव दिवस, आस्था और गौरव का प्रतीक पर्व- अशोक विश्वकर्मा

भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्योत्सव दिवस आस्था और गौरव का प्रतीक पर्व है। ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मांड के शिल्पी हैं और शिल्प कला, यंत्र और निर्माण के देवता माने जाते हैं। माघ शुक्ल त्रयोदशी को भगवान त्वष्टा विश्वकर्मा की जयंती हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा के त्वष्टा स्वरूप का पूजन होता है।

वाराणसी: ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने माघ शुक्ल त्रयोदशी भगवान त्वष्टा विश्वकर्मा के प्राकट्योत्सव दिवस पर नमन करते हुए कहा भगवान विश्वकर्मा हमारी आस्था और गौरव के प्रतीक है। विश्वकर्मा समाज के लोग माघ शुक्ल त्रयोदशी को भगवान त्वष्टा विश्वकर्मा की जयंती हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाते है। उन्होंने कहा पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का शिल्पी माना जाता है। मान्यतानुसार, ब्रह्मा के सातवें पुत्र के रूप में भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इन्हें शिल्प कला, यंत्र और निर्माण का देवता माना जाता है। यह जयंती भारतीय पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल त्रयोदशी को परंपरागत रूप से मनाई जाती है।
इस दिन भगवान विश्वकर्मा के त्वष्टा स्वरूप का पूजन होता है, जिन्हें देवताओं का शिल्पी और आचार्य कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने इस दिन साक्षात दर्शन दिए थे, और इसका वर्णन वराह पुराण (वृहद वशिष्ठ पुराण) में भी मिलता है। उन्होंने कहा विश्वकर्मा जयंती का पर्व धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। यह पर्व सृजन की शक्ति और मानवीय कौशल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है।

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