June 10, 2026 3:07 am

विश्वकर्मा समाज किसी दल का गुलाम नहीं, आबादी के अनुपात में मिले भागीदारी – अशोक विश्वकर्मा

महासभा का लगातार रुख है कि समाज के उत्थान के लिए जनसंख्या के समानुपातिक भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।

वाराणसी: ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा है कि विश्वकर्मा समाज किसी दल का गुलाम नहीं है। व्यक्तिगत राजनीतिक स्वार्थ लाभ के लिए यदि कोई किसी दल की गुलामी करता है, तो इसका मतलब यह नहीं की पूरा समाज उस दल का गुलाम है। उन्होंने कहा कि समाज उसी के साथ खड़ा होगा जो समाज के सर्वांगीण विकास का अवसर और आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व अर्थात भागीदारी देगा। उन्होंने कहा कि महासभा के नेतृत्व में देश भर के पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों द्वारा लंबे समय से आबादी के अनुपात में भागीदारी की मांग उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय का सभी दलों ने सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया है। चुनाव के समय भगवान विश्वकर्मा पूजा और विभिन्न योजनाओं का हवाला देकर समाज को लुभाने की कोशिश की जाती है, लेकिन चुनाव के बाद जमीनी स्तर पर इस समाज की हमेशा उपेक्षा की जाती है। जबकि इस समुदाय की जनसंख्या लगभग 11% फीसदी के करीब है, लेकिन उस अनुपात में राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। बढ़ई, लोहार, सुनार, ताम्रकार और मूर्तिकार, जैसे पारंपरिक कार्यों से जुड़ा यह समाज ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एक बड़ी आबादी वाला समुदाय है। लोकसभा, विधानसभा और सरकारी नौकरियों में इनके आबादी के अनुसार ही आरक्षण और सीटों का आवंटन सुनिश्चित होना चाहिए। ताकि हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के अनुसार उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समाज के नेताओं द्वारा लगातार यह मांग की जा रही है कि जाति आधारित जनगणना (Caste Census) में विश्वकर्मा समाज को उनकी सही और सटीक पहचान के साथ गणना की जाए ताकि सरकारी योजनाओं का उन्हें समुचित लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि समाज को मात्र आरक्षण नहीं, बल्कि अपनी पुश्तैनी कलाओं के संरक्षण और आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय मदद, सरकारी टेंडर और विश्वकर्मा विकास निगम का गठन होना चाहिए। कारीगरों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत बिना गारंटी के ऋण की सुविधा मिलनी चाहिए। महासभा सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर लगातार यह आवाज उठा रहा है कि समाज के उत्थान के लिए जनसंख्या के समानुपातिक भागीदारी का अधिकार मिलना चाहिए।