वाराणसी के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) करौंदी से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रयागराज आईटीआई विवाद की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब वाराणसी में प्रधानाचार्य एम.के. सिंह पर एक बेदाग और ईमानदार कार्यदेशक (फोरमैन) विनय कुमार सिंह के मानसिक, आर्थिक और विभागीय उत्पीड़न के संगीन आरोप लगे हैं। आरोप है कि प्रधानाचार्य अपने रसूख के नशे में इस कदर चूर हैं कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि “जिलाधिकारी हो या मुख्यमंत्री, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” इस पूरे प्रकरण ने विभागीय कार्यप्रणाली और सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले के मुख्य और चौंकाने वाले आरोप
जातिसूचक गालियां और जान से मारने की धमकी: शिकायत के अनुसार, प्रधानाचार्य ने अपनी हदों को पार करते हुए ईमानदार कार्यदेशक विनय कुमार सिंह को सरेआम जातिसूचक शब्द कहे और जान से मारने की धमकियां दीं।
सवर्ण होने पर विवादित टिप्पणी: आरोप है कि प्रधानाचार्य ने खुलेआम कहा कि इस सरकार में ‘सवर्ण होना एक अभिशाप’ बन गया है, जो सीधे तौर पर शासन की छवि को धूमिल करने का प्रयास है।
टाटा इलेक्ट्रिक वाहन का निजी इस्तेमाल: प्रशिक्षणार्थियों को सिखाने के लिए संस्थान को मिली टाटा की इलेक्ट्रिक गाड़ी का प्रधानाचार्य द्वारा कथित तौर पर अपनी निजी टैक्सी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जो प्रमुख सचिव एम. देवराज के स्पष्ट निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
करोड़ों के सरकारी फंड की बंदरबांट: प्रशिक्षण के लिए आए करोड़ों रुपये के बजट को कथित रूप से प्रधानाचार्य के सरकारी आवास को चमकाने और निजी सुविधाओं पर खर्च किए जाने की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठी है।
रिश्वत (सुविधा शुल्क) की मांग और एरियर पर कुंडली: निदेशक प्रशिक्षण द्वारा चार माह पूर्व ही विनय कुमार सिंह की एसीपी (ACP) स्वीकृत की जा चुकी थी। बजट होने के बावजूद प्रधानाचार्य ने ‘सुविधा शुल्क’ (रिश्वत) न मिलने के कारण एरियर का भुगतान रोक रखा है।
बायोमेट्रिक सिस्टम से परहेज: संस्थान में जानबूझकर बायोमेट्रिक मशीन नहीं लगाई गई है, ताकि हाजिरी और कार्यों में मनमानी कर भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दिया जा सके।
नियमों की धज्जियां और तानाशाही का चरम
आरोप है कि डीएम वाराणसी और निदेशक प्रशिक्षण के स्पष्ट निर्देशों को रद्दी की टोकरी में डालते हुए, प्रधानाचार्य मनमाने ढंग से कार्य आवंटन कर रहे हैं। इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक के विशेषज्ञ कार्यदेशक को जबरन इलेक्ट्रिकल काम में झोंक दिया गया है।
दागदार है पुराना इतिहास, अब निलंबन की साजिश
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। मौजूदा प्रधानाचार्य एम.के. सिंह को पूर्व में आगरा के बालकेश्वर में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा निलंबित किया जा चुका है। अब वही दागी अधिकारी, अपनी खामियां छिपाने के लिए एक ईमानदार कर्मचारी की सर्विस बुक में कांट-छांट कर उसे निलंबित करने की खौफनाक साजिश रच रहा है।
कर्मचारी संगठन और पीड़ित पक्ष अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। इस पूरे प्रकरण की जानकारी उच्चाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सौंप दी गई है। कर्मचारियों की मांग है कि इस ‘तानाशाही’ की तत्काल निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो, दोषियों पर कठोर से कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए और प्रताड़ित कर्मचारियों को सुरक्षा दी जाए, ताकि न्याय का इकबाल बुलंद रहे।








