विश्वकर्मा समाज का बड़ा ऐलान: ’17 सितंबर को घोषित हो राजकीय अवकाश, हम हैं भारत के असली निर्माता, ‘सिंधु घाटी की ईंट से लेकर अयोध्या के राम मंदिर तक… हर पत्थर पर हमारा योगदान दर्ज।
‘जर्मनी में जिसे इंजीनियर कहते हैं, भारत में उसे विश्वकर्मा कहा जाता है’ – ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा ने उठाई हुंकार
वाराणसी: ”अगर हमारे हाथ रुक गए, तो देश की तमाम मशीनें थम जाएंगी। सिंधु घाटी की पहली ईंट से लेकर अयोध्या के भव्य राम मंदिर तक, इस राष्ट्र के कण-कण और हर पत्थर पर विश्वकर्मा समाज का पसीना दर्ज है।
यह बेबाक और ओजस्वी विचार हैं ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा के। उन्होंने देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा के सम्मान में 17 सितंबर (विश्वकर्मा पूजा दिवस) को देशभर में राजकीय अवकाश घोषित करने की पुरजोर मांग उठाई है।
हम सिर्फ जाति नहीं, देश की असली स्किल कैपिटल हैं…
राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने श्रम और कौशल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश में 5 करोड़ से अधिक अत्यंत कुशल कारीगर—जैसे बढ़ई, लोहार, स्वर्णकार और राजमिस्त्री—दिन-रात राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं।
MSME की आत्मा: देश की लगभग 80 प्रतिशत MSME इकाइयां और फैक्ट्रियां विश्वकर्मा समाज के हुनर से संचालित होती हैं। लेथ मशीन से लेकर वेल्डिंग, फर्नीचर निर्माण और औजार बनाने तक का हर काम इनकी निपुणता पर टिका है।
Make in India की मजबूत रीढ़: अशोक विश्वकर्मा ने कहा, “जिन्हें जर्मनी में उच्च दर्जा देकर ‘इंजीनियर’ कहा जाता है, वही हुनरमंद भारत की पावन धरती पर ‘विश्वकर्मा’ कहलाते हैं। असल मायनों में ‘मेक इन इंडिया’ की असली ताकत यही समाज है।
GDP में 15% मैन्युफैक्चरिंग योगदान हमारे हथौड़े का…
देश के विकास में श्रम शक्ति का आंकड़ा रखते हुए उन्होंने कहा कि हर घर, पुल, इमारत और मंदिर के निर्माण में हमारे समाज की मेहनत शामिल है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के जरिए देश की जीडीपी में 15 फीसदी का योगदान सीधे तौर पर हमारे हथौड़े और औजारों की गूंज से आता है।
”हमने बेजान पत्थरों को तराश कर भव्य मंदिर का रूप दिया, कच्चे लोहे को आधुनिक मशीन बनाया और मिट्टी को आलीशान महलों में बदल दिया। हम निर्माण के संवाहक हैं, हम ही राष्ट्र के भाग्य विधाता हैं। भेदभाव से हमारा कोई नाता नहीं, सिर्फ और सिर्फ नवनिर्माण से हमारा नाता है।
17 सितंबर को राष्ट्रीय/राजकीय अवकाश की मांग…
विश्वकर्मा समाज के गौरव, स्वाभिमान और देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा के अमूल्य योगदान को सम्मान देने के लिए महासभा ने केंद्र व राज्य सरकारों से मांग की है कि 17 सितंबर को सार्वजनिक एवं राजकीय अवकाश घोषित किया जाए, ताकि करोड़ों श्रमसाधक अपने आराध्य की पूजा-अर्चना पूरे सम्मान के साथ कर सकें।








