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असली से भी ज्यादा ‘असली’ ₹20 का सिक्का! UP में पकड़ा गया देश का सबसे बड़ा ‘नकली टकसाल गिरोह’, खपा दिए 70 करोड़।

 

​‘नकली सिक्कों का सुल्तान’ उपकार लूथरा गैंग ध्वस्त! 70 करोड़ के जाली सिक्के बाजार में फेंकने वाली 5 सिरफिरों की गैंग सलाखों के पीछे।

पश्चिम यूपी से दिल्ली-एनसीआर तक हड़कंप! सहारनपुर पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक में नकली सिक्कों की सीक्रेट फैक्ट्री तबाह, करोड़ों के जाली सिक्के जब्त।

​सहारनपुर/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह की रीढ़ तोड़ दी है, जो असली के समानांतर ‘नकली भारतीय मुद्रा’ की अपनी अलग दुनिया चला रहा था। पुलिस ने 20 रुपये मूल्यवर्ग के नकली सिक्के ढालने वाले एक बेहद हाई-टेक और शातिर सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए इसके 5 मुख्य सरगनाओं को दबोच लिया है। शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है, उसने सुरक्षा और वित्तीय एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं – यह गिरोह अब तक देश के अलग-अलग बाजारों में 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के उतार चुका है!

​फैक्ट्री में सिक्के ढालने का चल रहा था खेल, 5 शातिर दबोचे…
​सहारनपुर पुलिस की स्पेशल टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर सिक्के बनाने के इस अवैध अड्डे को ध्वस्त कर दिया। पुलिस के चंगुल में फंसे आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है।

​उपकार लूथरा (मास्टरमाइंड)
​हिमांशु उर्फ गुल्लू
​कुलदीप
​संतोष चौरसिया
​अनुराग पाल

​यह गिरोह इतनी बारीकी से 20 रुपये के सिक्के तैयार कर रहा था कि आम आदमी तो क्या, अनुभवी व्यापारियों के लिए भी असली और नकली का फर्क पहचानना नामुमकिन था।

​देश की अर्थव्यवस्था में 70 करोड़ का ‘सफेद जहर’…
​जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे। 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाया जाना वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद खतरनाक संकेत है। छोटे मूल्यवर्ग (₹20) के सिक्के होने के कारण आमतौर पर लोग और दुकानदार इन पर ज्यादा शक नहीं करते थे, और इसी बात का फायदा उठाकर यह सिंडिकेट रोजाना लाखों रुपये की फर्जी करेंसी सिस्टम में घुसा रहा था।

​नेक्सस की तह तक जाएगी पुलिस- कौन-कौन से बड़े नाम शामिल???
​मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में कई जांच टीमें गठित कर दी गई हैं। पुलिस अब निम्नलिखित पहलुओं पर तेजी से काम कर रही है।

​सप्लाई चेन का पर्दाफाश: यह गिरोह किन-किन माध्यमों, हाट-बाजारों, पेट्रोल पंपों और बड़े रिटेल नेटवर्क के जरिए इन सिक्कों की सप्लाई करता था?

​बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज: सिक्के बनाने में इस्तेमाल होने वाला खास मेटल (धातु), डाइ और आधुनिक मशीनें कहां से खरीदी गईं?

​फाइनेंशियल मास्टरमाइंड: क्या इस गिरोह के तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े हैं?

​सहारनपुर पुलिस के मुताबिक, इस मामले में जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

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