February 6, 2026 6:53 am

रविदास जयंती : संत शिरोमणि के दर्शन को उमड़ा 10 लाख श्रद्धालुओं का सैलाब, 150 फीट ऊंचा ‘हरि’ निशान का चोला बदला, पुष्पवर्षा-भांगड़ा के बीच गूंजे जयकारे

वाराणसी में रविदास जयंती के अवसर पर संत शिरोमणि की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर में भव्य उत्सव मनाया गया। लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। 150 फीट ऊंचे ‘हरि’ निशान का चोला बदला गया, पुष्पवर्षा और भंगड़ा के बीच जयकारे गूंजे। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं ने लंगर और भजन-कीर्तन में हिस्सा लिया।

वाराणसी: रविदास जयंती के अवसर पर संत शिरोमणि की जन्मस्थली पर सीर गोवर्धनपुर में भव्य और ऐतिहासिक उत्सव देखने को मिला। पूरा क्षेत्र भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया। देश के कोने-कोने के साथ ही विदेशों से पहुंचे श्रद्धालुओं और एनआरआई भक्तों ने जन्मस्थली को “मिनी पंजाब” का रूप दे दिया। हर ओर “जय गुरुदेव, तन गुरुदेव” के जयकारे गूंजते रहे और भंगड़े की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते दिखे। भोर से ही गुरु दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। दर्शन के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबी लाइन लगी रही। अनुमान के अनुसार 10 लाख से अधिक श्रद्धालु और अनुयायी सीर गोवर्धनपुर पहुंचे हैं। वहीं 10 चार्टर्ड विमानों से करीब 1000 से अधिक एनआरआई भक्त काशी आए हैं।

भोर में बदला गया 150 फीट ऊंचे ‘हरि’ निशान का चोला…
रविदास जयंती यानी माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित लगभग 150 फीट ऊंचे ‘हरि’ नाम की रविदासी पताका का चोला परंपरागत रूप से बदला गया। श्रद्धालु देर रात से ही इस ऐतिहासिक क्षण की तैयारी में जुट गए थे। जैसे ही सुबह करीब 5 बजे चोला बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई, लाखों श्रद्धालु अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर तालियां बजाने लगे, झूमने लगे और गुरु का नाम स्मरण करने लगे।

चोला बदलने के दौरान पुष्पवर्षा की गई। लगभग दो कुंतल फूल अलग-अलग स्थानों पर रखे गए थे, जिनकी वर्षा श्रद्धालुओं पर की गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो श्रद्धालु आस्था की गंगा में डुबकी लगा रहे हों। पूरे वातावरण में भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

भजन-कीर्तन, लंगर और सेवा का विराट आयोजन…
मंदिर परिसर में लगातार भजन-कीर्तन का आयोजन चलता रहा। महिलाएं कतारबद्ध होकर कीर्तन करती रहीं। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने लंगर की ओर रुख किया, जहां कई दिनों से लगातार लंगर सेवा चल रही है। लाखों की संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण कर चुके हैं।

बताया जा रहा है कि लंगर के लिए छह से अधिक भट्ठियों पर रोटियां बनाई गईं। करीब 20 लाख से अधिक रोटियां और लगभग 15 क्विंटल नमक की खपत हुई। करीब 10 हजार से अधिक सेवादार व्यवस्था संभालने में लगे रहे और लगभग 9 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की सेवा की।

टेंट सिटी, सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी…
पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं के लिए लगभग 150 टेंटों की टेंट सिटी बनाई गई है, जहां हजारों श्रद्धालुओं का ठहराव है। संत रविदास जयंती को देखते हुए मेला क्षेत्र में अस्थायी पुलिस चौकी स्थापित की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था में छह इंस्पेक्टर, 115 पुरुष दरोगा, 35 महिला दरोगा, 225 पुरुष सिपाही, 45 महिला सिपाही और दो कंपनी पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। आग से सुरक्षा के लिए दो फायर स्टेशन भी बनाए गए हैं।

स्वर्ण मंदिर की ओर बढ़ता संकल्प…
मुख्य सत्संग पंडाल में संगत द्वारा भारी दान भी किया गया। पंजाब के एक भक्त ने 20 लाख रुपये और पंचकूला (हरियाणा) की संगत ने पांच लाख रुपये का चेक मंदिर ट्रस्ट को सौंपा। इसके अलावा गोपनीय दान भी बड़ी मात्रा में हुए।

इन दानराशियों से मंदिर को स्वर्णमंदिर के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया है। मंदिर के गुंबद को स्वर्णमंडित किया जा चुका है, प्रवेश द्वार पर सोने का कवर और सोने का दीपक लगाया गया है। मंदिर में अब तक करीब 200 किलोग्राम से अधिक सोने का उपयोग हो चुका है।

गुरु दरबार आने का इंतजार करते हैं अनुयायी…
श्रद्धालुओं का कहना है कि हर साल वे गुरु के दरबार में आने का इंतजार करते हैं और अगले वर्ष फिर अपनी मन्नत पूरी करने के लिए यहां पहुंचेंगे। एक ओर शब्द-कीर्तन, दूसरी ओर दर्शन-पूजन तो दूसरी ओर चोला बदलने के दिव्य दृश्य के दौरान सीर गोवर्धनपुर पूरी तरह से रैदासियों का शहर बन गया।

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