वाराणसी में दवा व्यापारियों ने ‘मेडिकल बंद’ कर दिया। ऑनलाइन फार्मेसी और कॉर्पोरेट दवा कारोबार के विरोध में शहर से ग्रामीण इलाकों तक हजारों मेडिकल स्टोर बंद रहे। प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों में काउंटर चालू रखने का दावा किया, पर भीड़ के आगे व्यवस्था फेल हो गई। दवा व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन यूपी से राष्ट्रीय स्तर तक जाएगा।
वाराणसी: धर्मनगरी वाराणसी बुधवार को एक बड़े स्वास्थ्य संकट की गवाह बनी। ऑनलाइन फार्मेसी और कॉर्पोरेट दवा कारोबार के विरोध में दवा व्यापारियों द्वारा बुलाए गए “मेडिकल बंद” ने पूरे शहर की रफ्तार रोक दी। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हजारों मेडिकल स्टोरों के शटर बंद रहे, जिससे मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सुबह होते ही वाराणसी के प्रमुख दवा बाजारों- लंका, कबीरचौरा, भदैनी, गोदौलिया, चौक, पांडेयपुर और आसपास के कस्बों में मेडिकल स्टोर बंद दिखाई दिए। दवा व्यापारियों ने एकजुट होकर ऑनलाइन दवा कंपनियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
दवा कारोबारियों का आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां बिना उचित निगरानी और नियमों के दवाइयों की बिक्री कर रही हैं, जिससे न सिर्फ स्थानीय कारोबार खत्म हो रहा है बल्कि लोगों की जान भी खतरे में पड़ रही है।
मरीज बेहाल, तीमारदारों की टूटी उम्मीदें…
मेडिकल बंदी का सबसे ज्यादा असर अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों पर देखने को मिला। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर, सर सुंदरलाल अस्पताल, कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल और दीनदयाल अस्पताल के बाहर सुबह से ही दवाओं के लिए लंबी कतारें लग गईं।
कई तीमारदार हाथों में पर्ची लिए एक मेडिकल से दूसरे मेडिकल तक भटकते नजर आए। किसी को बुखार की दवा नहीं मिली, तो कोई इंजेक्शन और जीवन रक्षक दवाओं के लिए परेशान दिखा।
गाजीपुर से आए एक मरीज के परिजन ने बताया कि डॉक्टर ने तुरंत दवा लाने को कहा था, लेकिन पूरा शहर बंद होने के कारण घंटों भटकना पड़ा। वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर दवाएं अधिक कीमत पर बेची जा रही थीं।
आखिर क्यों भड़के दवा कारोबारी???
दवा विक्रेता संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां छोटे दवा व्यापारियों के अस्तित्व पर सीधा हमला कर रही हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना डॉक्टर के वैध पर्चे के दवाएं बेची जा रही हैं, जो बेहद खतरनाक है।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें…
• अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल रोक।
• रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की निगरानी में ही दवा बिक्री।
• छोटे मेडिकल स्टोर और कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा।
• नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की ऑनलाइन सप्लाई पर सख्त कार्रवाई।
दवा व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
प्रशासन के इंतजाम फेल, अस्पतालों में अफरा-तफरी…
हालांकि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में दवा काउंटर चालू रखने का दावा किया था, लेकिन मरीजों की भारी भीड़ के सामने व्यवस्थाएं चरमरा गईं। कई जगह धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
सरकारी अस्पतालों की फार्मेसी पर लंबी लाइनें लगी रहीं और कई मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कुछ गंभीर मरीजों के तीमारदारों को शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर दवा तलाशनी पड़ी।
‘यह सिर्फ शुरुआत है’, आंदोलन को देशभर में ले जाने की चेतावनी…
दवा व्यापारी संगठनों ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कारोबार की नहीं बल्कि जनता की सुरक्षा की भी है। उनका दावा है कि अगर ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त कानून नहीं बने तो भविष्य में नकली और गलत दवाओं का खतरा और बढ़ जाएगा।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को पूरे उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक फैलाया जाएगा।





