इमरजेंसी या ‘इंतजार कक्ष’? SSPG अस्पताल की घोर लापरवाही से मंडराया मरीजों की सांसों पर संकट, घंटों खाली पड़ा रहा रजिस्ट्रेशन काउंटर ऋग्वेद के प्रमाण के साथ महासभा का बड़ा ऐलान! 17 सितंबर ही है ‘सृष्टि दिवस’, राजकीय अवकाश के लिए आर-पार की लड़ाई श्रेया उपाध्याय हत्याकांड का मुख्य आरोपी विवेक चौबे एनकाउंटर में गिरफ्तार! पैर में लगी गोली, तमंचा व कारतूस बरामद ANTF व अलीनगर पुलिस का बड़ा धमाका! 3 करोड़ रुपये की हेरोइन संग तस्कर गिरफ्तार, वाराणसी से जुड़े तार वाराणसी में गरजा विश्वकर्मा समाज! ‘ओबीसी सुरक्षा कानून’ और राजकीय अवकाश की उठी बुलंद मांग, अशोक विश्वकर्मा का बड़ा ऐलान विश्वकर्मा पूजा पर अवकाश न मिलने से आक्रोश! राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने सार्वजनिक रूप से जन्मदिन न मनाने का लिया बड़ा फैसला

इमरजेंसी या ‘इंतजार कक्ष’? SSPG अस्पताल की घोर लापरवाही से मंडराया मरीजों की सांसों पर संकट, घंटों खाली पड़ा रहा रजिस्ट्रेशन काउंटर

 

वाराणसी: ​इमरजेंसी में हर एक सेकंड जिंदगी और मौत के बीच का फासला तय करता है। लेकिन वाराणसी के श्री शिव प्रसाद गुप्त (एसएसपीजी) मंडलीय जिला अस्पताल में यह संवेदनशील व्यवस्था महज एक मजाक बनकर रह गई है। इलाज की उम्मीद में तड़पते मरीजों और उनके बदहवास तीमारदारों को अस्पताल की चौखट पर पहुंचते ही पहला झटका रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लग रहा है, जो घंटों से लावारिस पड़ा हुआ है।
​गंभीर हादसे के शिकार, असहनीय दर्द से कराहते और अचानक तबीयत बिगड़ने पर भागते-भागते अस्पताल पहुंचे मरीजों को प्राथमिक पर्चा बनवाने के लिए भी घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। काउंटर खाली है, कुर्सी धूल खा रही है, और जिम्मेदार कर्मचारी नदारद हैं।

निगरानी शून्य, व्यवस्था बेपटरी: जिम्मेदार मौन क्यों???
​यह गंभीर स्थिति अस्पताल प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है:
​ड्यूटी पर तैनाती का सच क्या है? यदि आपातकालीन सेवा में कर्मचारी की ड्यूटी लगी थी, तो वह अपनी जगह से घंटों गायब कैसे रहा?
अधिकारियों की निगरानी पर सवाल: क्या अस्पताल के बड़े अधिकारियों का औचक निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित है? इमरजेंसी जैसी जगह पर इतनी बड़ी चूक कैसे अनदेखी रह गई?
​जवाबदेही तय होगी या लीपापोती? क्या गरीब और लाचार मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले कर्मचारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?

​गरीबों की आखिरी उम्मीद पर प्रशासनिक लापरवाही का वार…
​सरकारी अस्पताल वाराणसी और आसपास के जिलों के गरीब मरीजों की सबसे बड़ी उम्मीद होते हैं। जब इमरजेंसी के मुख्य द्वार पर ही इलाज के बजाय ‘इंतजार का इम्तिहान’ शुरू हो जाए, तो आम जनता का भरोसा टूट जाता है।
​अस्पताल प्रशासन को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित दोषी कर्मचारियों पर सख्त एक्शन लेना चाहिए। इमरजेंसी का सीधा नियम है- “मरीज को तुरंत इलाज चाहिए, कतार और खाली काउंटर नहीं!” यदि समय रहते इस अव्यवस्था पर नकेल नहीं कसी गई, तो किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होगी।

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