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शिक्षा और समर्पण के बिना राष्ट्र निर्माण असंभव- अशोक विश्वकर्मा

​फ्लोरेंस स्कूल में शिक्षक दिवस की धूम: छात्रों ने तिलक लगाकर, उपहार देकर गुरुओं का किया भव्य अभिनंदन

 दुलहीपुर/चन्दौली: ‘फ्लोरेंस स्कूल’ में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिवस ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में अत्यंत उत्साह, गरिमा और धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति अटूट श्रद्धा और सम्मान प्रकट करते हुए इस दिन को यादगार बना दिया।

​समारोह की शुरुआत छात्रों द्वारा शिक्षकों के रोली-तिलक और भव्य स्वागत के साथ हुई। विद्यार्थियों ने केक काटा और अपने प्रिय गुरुजनों को अंगवस्त्रम सहित विभिन्न उपहार भेंट कर उनका भावपूर्ण अभिनंदन किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने मनमोहक भाषण और भावुक कर देने वाली कविताएं प्रस्तुत कर शिक्षकों के मार्गदर्शन के प्रति आभार जताया।

​शिक्षक समाज को त्याग और आदर का पाठ पढ़ाते हैं

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रबंध निदेशक अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक बहुआयामी व्यक्तित्व, महान दार्शनिक और छात्रों के बीच अत्यंत लोकप्रिय शिक्षक थे। उन्होंने अपनी पुस्तक “आधुनिक भारत के राजनीतिक विचारक” में स्पष्ट किया है कि भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में शिक्षकों और शिक्षा की क्या अहमियत है।

​अशोक विश्वकर्मा ने जोर देते हुए कहा…

​“राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का निर्माण शिक्षा और शिक्षकों के निस्वार्थ समर्पण के बिना संभव ही नहीं है। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह गुरु-शिष्य की पावन परंपरा और उनके प्रति कृतज्ञता को जीवित रखने का पर्व है।

​संस्कारवान व जिम्मेदार नागरिक गढ़ना ही शिक्षा का असली ध्येय

​प्रबंध निदेशक ने आगे कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य महज किताबी ज्ञान हासिल करना या परीक्षा में अंक पाना नहीं है, बल्कि युवाओं में अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और सही-गलत की पहचान विकसित कर उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है। समाज निर्माण में शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है और वे ही समाज को त्याग तथा सम्मान का भाव सिखाते हैं।

​इस दौरान विद्यालय का पूरा परिसर गुरु-वंदना और उत्साह से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम के अंत में प्रबंधन द्वारा सभी शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए उनका विशेष आभार व्यक्त किया गया।

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