विश्वकर्मा पूजा पर अवकाश न मिलने से आक्रोश! राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने सार्वजनिक रूप से जन्मदिन न मनाने का लिया बड़ा फैसला वरुणा में बैकफ्लो से घिरे काशीवासियों का दर्द बांटने पहुंचे सीएम योगी: हवाई सर्वेक्षण के बाद बांटी राहत सामग्री, बोले- ‘हर संकट में आपके साथ खड़ी है सरकार’ शिक्षा और समर्पण के बिना राष्ट्र निर्माण असंभव- अशोक विश्वकर्मा अधर्म के अंधकार पर धर्म का महाप्रकाश: अन्याय और अत्याचार के अंत का अमर प्रतीक है कृष्ण जन्मोत्सव – अशोक विश्वकर्मा भारी बारिश और जलजमाव का कहर! 2 सितंबर को कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूल बंद, BSA का कड़ा आदेश पटना के नन्हें ‘दशरथ मांझी’ का हुंकार! 6 साल का आदित्य हाथ में संविधान ले गर्दनीबाग में डटा, कहा- “सरकार का घमंड तोड़कर रहूँगा”

विश्वकर्मा पूजा पर अवकाश न मिलने से आक्रोश! राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने सार्वजनिक रूप से जन्मदिन न मनाने का लिया बड़ा फैसला

 

वाराणसी: ​भगवान विश्वकर्मा पूजा पर सार्वजनिक राजकीय अवकाश घोषित न किए जाने से आहत ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। संगठन के लंबे संघर्ष और कई लोकतांत्रिक आंदोलनों के बावजूद सरकार द्वारा इस मांग की अनदेखी किए जाने के विरोध में उन्होंने घोषणा की है कि जब तक विश्वकर्मा पूजा पर सरकारी छुट्टी की मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे सार्वजनिक रूप से अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे।

वर्षों के संघर्ष और उपेक्षा से उपजा आक्रोश…
​ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में विश्वकर्मा समाज और शिल्पकार समुदाय पिछले कई वर्षों से 17 सितंबर (विश्वकर्मा पूजा) के अवसर पर सार्वजनिक राजकीय अवकाश की मांग कर रहा है। अपनी इस न्यायोचित मांग को लेकर संगठन ने समय-समय पर देशभर में रेल रोको आंदोलन, पत्र भेजो अभियान, सामूहिक मुंडन, धरना-प्रदर्शन, सत्याग्रह और उपवास जैसे विभिन्न लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज बुलंद की है।
​तमाम विरोध प्रदर्शनों और ज्ञापनों के बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। महासभा का कहना है कि सरकार का यह रवैया करोड़ों शिल्पकारों, श्रमिकों और विश्वकर्मा समाज के प्रति उदासीनता को दर्शाता है।

अशोक विश्वकर्मा का भावुक और कड़ा बयान…
​अपने निर्णय की घोषणा करते हुए महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि देश के समस्त शिल्पकारों, तकनीकी विशेषज्ञों और श्रमिकों के स्वाभिमान, सामाजिक गौरव और अटूट आस्था का प्रतीक है। इस पावन अवसर से देश के करोड़ों नागरिकों की भावनाएं गहराई से जुड़ी हुई हैं।
​उन्होंने बेहद आहत मन से कहा, “हमारे वर्षों के संघर्ष को सरकार लगातार अनदेखा कर रही है। इससे भी अधिक पीड़ादायक यह है कि सत्ता के गलियारों और महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे हमारे अपने ही समाज के जनप्रतिनिधियों ने भी इस मांग को पूरा कराने के लिए कोई ठोस पहल या सहयोग नहीं किया।

स्वाभिमान के लिए जन्मदिन न मनाने का संकल्प…
​सरकार की बेरुखी और समाज के प्रतिनिधियों की निष्क्रियता से क्षुब्ध होकर अशोक विश्वकर्मा ने अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन से जुड़ा एक बड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार विश्वकर्मा पूजा पर सार्वजनिक राजकीय अवकाश घोषित करने की मांग को स्वीकार नहीं कर लेती, तब तक वे अपना जन्मदिन सार्वजनिक रूप से नहीं मनाएंगे और न ही कोई औपचारिक समारोह आयोजित करेंगे।
​महासभा के इस फैसले के बाद से विश्वकर्मा समाज और सहयोगी संगठनों में हलचल तेज हो गई है। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह निर्णय समाज के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उठाया गया एक प्रतीकात्मक कदम है। यदि सरकार ने जल्द ही इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक व्यापक और तेज किया जाएगा।

Leave a Comment

और पढ़ें