5 करोड़ विश्वकर्मा वंशियों का स्वाभिमान दांव पर! 17 सितंबर को राजकीय अवकाश घोषित करने की उठी पुरजोर मांग।
‘मंदिर से लेकर मशीनों तक जिस समाज का पसीना, उसकी आस्था से खिलवाड़ क्यों?’ – अशोक विश्वकर्मा।
लखनऊ/चन्दौली: उत्तर प्रदेश में भगवान श्री विश्वकर्मा पूजा दिवस के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) घोषित न किए जाने को लेकर विश्वकर्मा समाज में बेहद तीखा आक्रोश पनप रहा है। ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा ने सीधे तौर पर राज्य सरकार के इस रवैये को भेदभावपूर्ण करार देते हुए आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की यह अनदेखी प्रदेश के लगभग 5 करोड़ विश्वकर्मा वंशियों के स्वाभिमान, श्रद्धा और आस्था पर सीधा प्रहार है। यदि समय रहते मांगें न मानी गईं, तो इसका सीधा असर आने वाले विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा।
’सृष्टि के प्रथम शिल्पी की उपेक्षा क्यों?’ — महासभा का तीखा सवाल???
पत्रकारों से बातचीत करते हुए अशोक विश्वकर्मा ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा किसी एक जाति विशेष के नहीं, बल्कि पूरी सृष्टि के प्रथम शिल्पी, यंत्र-मंत्र और आधुनिक विज्ञान के जनक हैं।
”चाहे अयोध्या का भव्य श्रीराम मंदिर हो या अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराने वाला चंद्रयान — हर ऐतिहासिक निर्माण के पीछे विश्वकर्मा वंशजों का पसीना और हुनर लगा है। बिहार, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में जब इस दिन राजकीय अवकाश घोषित है, तो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश में यह सौतेला व्यवहार क्यों?
— अशोक कुमार विश्वकर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा)
प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है विश्वकर्मा समाज…
महासभा अध्यक्ष ने आंकड़ों और तथ्यों के साथ बात रखते हुए याद दिलाया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास विश्वकर्मा समाज की बदौलत ही सांस ले रहा है।
MSME सेक्टर का आधार: उत्तर प्रदेश के लगभग 90% MSME उद्योग, फर्नीचर, औजार निर्माण, मूर्तिकला, भवन निर्माण और ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग का काम पूरी तरह इसी समाज की कारीगरी पर टिका है।
अर्थव्यवस्था की रीढ़: विश्वकर्मा वंशज प्रदेश के औद्योगिक विकास की सबसे मजबूत कडी हैं, फिर भी सरकार उनके सबसे प्रमुख पर्व को सम्मान देने से कतरा रही है।
महासभा की 3 प्रमुख मांगें…
17 सितंबर को राजकीय अवकाश: श्री विश्वकर्मा पूजा के दिन तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए।
पाठ्यक्रम में योगदान शामिल हो: प्रदेश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम (Syllabus) में विश्वकर्मा समाज के शिल्प, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक योगदान को पढ़ाया जाए।
’विश्वकर्मा शिल्प श्रम सम्मान बोर्ड’ का गठन: शिल्पकारों और पारंपरिक कारीगरों के अधिकारों की रक्षा व कल्याण के लिए अलग से अधिकार संपन्न बोर्ड बनाया जाए।
सड़कों पर उतरेगा समाज: महासम्मेलन और धरने की चेतावनी…
अशोक विश्वकर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने इस जनभावना का आदर करते हुए तुरंत फैसला नहीं लिया, तो महासभा पूरे उत्तर प्रदेश के हर एक जनपद में चरणबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन दर्ज कराएगी।
इसके तहत जिला स्तर पर ज्ञापन, विरोध-धरना और प्रदेश स्तरीय ‘विशाल महासम्मेलन’ का आयोजन कर सरकार के खिलाफ लामबंदी की जाएगी। समाज अपनी आस्था और अधिकारों के सम्मान के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।








