लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा ने उन्हें नमन किया। अशोक विश्वकर्मा ने कहा कि शास्त्री जी ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर देश को प्रेरित किया और सादगी व ईमानदारी का उदाहरण पेश किया। शास्त्री जी के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
वाराणसी: ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, सादगी और ईमानदारी के प्रतीक, लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा शास्त्री जी ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर देश की आत्मा को जगाया, 1965 के युद्ध में देश का नेतृत्व किया और अपने उच्च विचारों व निस्वार्थ सेवा से हर भारतीय के दिल में अमिट छाप छोड़ी, उनके योगदान और आदर्शों को देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने देश के सैनिको और किसानों को सम्मान दिया। प्रधानमंत्री रहते हुए भी उनकी सादगी बेमिसाल थी। उन्होंने कभी दिखावा नहीं किया, बल्कि अपने आचरण से दिखाया कि सच्ची शक्ति विनम्रता और ईमानदारी में है। उन्होंने देश को 1965 के युद्ध के दौरान मजबूत नेतृत्व दिया। जिसने देश में नई ऊर्जा भर दी थी। 30 वर्ष से अधिक वर्षों तक अपनी समर्पित सेवा के दौरान लाल बहादुर शास्त्री अपनी उदात्त निष्ठा एवं क्षमता के लिए लोगों के बीच प्रसिद्ध थे। शास्त्री जी महात्मा गांधी से अत्यंत प्रभावित थे। उन्होंने कहा था मेहनत प्रार्थना करने के समान है महात्मा गांधी के समान विचार रखने वाले लाल बहादुर शास्त्री भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ पहचान है। 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में उनका निधन हुआ। उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य है, लेकिन उनका जीवन एक खुली किताब की तरह है, जो हमें निस्वार्थ सेवा का पाठ पढ़ाता है। उनके विचार, अनुशासन, आत्मनिर्भरता, और शांति के लिए संघर्ष आज भी प्रासंगिक हैं। उनके आदर्शों पर चलकर देश को मजबूत बनाया जा सकता है। शास्त्री जी सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचार थे। उनकी पुण्यतिथि पर हमें उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।













