नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि 50 साल या उससे अधिक समय तक किराए पर रहना स्वामित्व का अधिकार नहीं देता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किरायेदारी एक वैधानिक व्यवस्था है, न कि स्वामित्व का अधिकार। यह फैसला एक 63 वर्ष पुराने विवाद से जुड़ा है, जिसमें किराएदार ने दावा किया था कि वह लंबे समय से दुकान का उपयोग कर रहा है, इसलिए अब उसे उसका स्वामी माना जाए। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए मकान मालिक को संपत्ति का वैध अधिकार प्रदान किया और किराएदार को दुकान खाली करने का निर्देश दिया।
मुख्य बिंदु…
– लंबी अवधि का किराया: 50 साल से अधिक किराए पर रहना स्वामित्व का अधिकार नहीं देता।
– किरायेदारी की शर्तें: किराया देना दर्शाता है कि कब्जा मालिक की अनुमति से है।
– Adverse Possession: यह तभी लागू होता है जब कब्जा बिना अनुमति और विरोध के हो।
– मकान मालिक की आवश्यकता: मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता (bona fide need) को वैध कारण माना गया।
– निर्णय का प्रभाव: यह फैसला किरायेदारी विवादों में देशव्यापी नजीर बनेगा।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि किराए पर रहना मालिकाना हक नहीं बनाता, और मालिक अपने वैध अधिकार के लिए अदालत से संरक्षण पा सकता है।












