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विश्वकर्मा पूजा पर बंद रहें सारे कारखाने! 17 सितंबर को घोषित हो सरकारी छुट्टी, अशोक विश्वकर्मा ने यूपी सरकार से की मांग

 

​लखनऊ: देश के निर्माण में पसीना बहाने वाले शिल्पकारों, कारीगरों और मजदूरों की भावनाओं को लेकर अब एक बड़ी मांग उठी है। ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश सरकार के सामने पुरजोर मांग रखी है कि 17 सितंबर को होने वाले भगवान विश्वकर्मा पूजा पर्व पर पूरे प्रदेश में राजकीय सार्वजनिक अवकाश (Government Holiday) घोषित किया जाए।

​राष्ट्र निर्माण की नींव हैं विश्वकर्मा समाज के लोग…
​अशोक कुमार विश्वकर्मा ने सीधे और दोटूक शब्दों में कहा कि इस देश को बनाने और चमकाने में विश्वकर्मा समाज का योगदान सबसे आगे रहा है। भगवान विश्वकर्मा केवल एक कुलदेवता नहीं हैं, बल्कि वे समाज के गौरव, स्वाभिमान और अस्तित्व के सबसे बड़े प्रतीक हैं।
​उन्होंने याद दिलाया कि 17 सितंबर का दिन केवल किसी एक समाज विशेष का नहीं होता। इस दिन देश भर के तमाम औद्योगिक प्रतिष्ठानों, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों, कल-कारखानों से लेकर सड़क किनारे छोटे-मोटे औजारों से रोजी-रोटी कमाने वाले हर छोटे-बड़े कारीगर अपनी दुकानें और काम बंद रखते हैं। बिना किसी जाति-पात या भेदभाव के करोड़ों लोग पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करते हैं।

​जब दूसरों को सम्मान, तो विश्वकर्मा पूजा पर चुप्पी क्यों???
​अशोक विश्वकर्मा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब देश में तमाम देवी-देवताओं, महान महापुरुषों, धर्म गुरुओं और दिग्गज राजनेताओं के सम्मान में सार्वजनिक छुट्टियां घोषित की जा सकती हैं, तो फिर करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र भगवान विश्वकर्मा के दिन पर छुट्टी क्यों नहीं?
​”महापुरुषों और देवी-देवताओं के नाम पर छुट्टियां देना उनके देश, समाज और संस्कृति में दिए गए योगदान को जीवंत रखता है। उनके आदर्श हमें जीवन में सही राह दिखाते हैं। ऐसे में निर्माण और सृजन के देव भगवान विश्वकर्मा के पर्व पर अवकाश होना पूरी तरह न्यायसंगत है।

​जनभावनाओं का सम्मान करे सरकार…
​अपनी मांग को धार देते हुए महासभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत जैसे विविधता से भरे देश में सांस्कृतिक और धार्मिक एकता तभी बनी रह सकती है, जब सरकार हर वर्ग, समुदाय और परंपरा की भावनाओं का दिल से सम्मान करे।
​विश्वकर्मा पूजा कोई साधारण दिन नहीं, बल्कि समाज के पसीने, हुनर और आस्था का महापर्व है। इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार को बिना किसी देरी के करोड़ों कारीगरों, श्रमिकों और जन-जन की भावनाओं को समझते हुए 17 सितंबर को राजकीय सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का ऐतिहासिक फैसला लेना चाहिए।

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