वाराणसी में सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण जल्द ही शुरू होने वाला है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ब्रिज की डिजाइन फाइनल हो चुकी है और यह देश का सबसे बड़ा ब्रिज होगा, जिसमें चार रेलवे लाइनें और छह लेन की सड़क एक साथ होंगी। इस ब्रिज का निर्माण मालवीय पुल के समानांतर किया जाएगा और इसका उद्देश्य वाराणसी और चंदौली के बीच यातायात को सुगम बनाना है।
वाराणसी: रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी, बनारस और काशी रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण कर यात्री सुविधाओं और विकास कार्यों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और यात्रियों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सिग्नेचर ब्रिज के बाबत भी चर्चा की। ब्रिज की डिजाइन फाइनल हो चुकी है। जल्द निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
रेलमंत्री ने बताया कि मालवीय पुल के समानांतर बनने वाले सिग्नेचर ब्रिज की डिजाइन फाइनल कर ली गई है और जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह ब्रिज देश का सबसे बड़ा होगा, जिसमें चार रेलवे लाइनें और छह लेन की सड़क एक साथ होंगी। साथ ही, हाइवे पर आवागमन कर रहे लोगों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
रेलमंत्री ने यह भी कहा कि वाराणसी, बनारस और काशी रेलवे स्टेशन को मिलाकर एक संयुक्त मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इस प्लान में यात्रियों की सुविधाओं के साथ-साथ शहर के हेरिटेज लुक को भी बरकरार रखने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली रेलवे स्टेशन की तर्ज पर वाराणसी स्टेशन पर स्थायी होल्डिंग एरिया बनाया जाएगा ताकि त्योहारों और विशेष अवसरों पर यात्रियों को भीड़ की समस्या का सामना न करना पड़े।
रेलमंत्री ने आगे बताया कि वाराणसी रेलवे स्टेशन पर रोपवे स्टेशन भी विकसित किया जा रहा है, जिसे बनारस स्टेशन से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को शहर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने में सुविधा होगी। साथ ही, काशी रेलवे स्टेशन को एक बड़े स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां से नई ट्रेनों का संचालन होगा। उन्होंने कहा कि बनारस स्टेशन से दक्षिण भारत की दिशा में चलने वाली ट्रेनों के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है, जिससे कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।
सिग्नेचर ब्रिज की कुछ प्रमुख विशेषताएं…
– लंबाई: 1074 मीटर
– पिलर्स की संख्या: 08
– कुल लागत: 2642 करोड़ रुपये
– रेलवे ट्रैक: 04 लेन
– सड़क मार्ग: 06 लेन
– निर्माण का समय: 04 साल
इस ब्रिज के निर्माण से वाराणसी के यातायात पर पड़ने वाला भारी दबाव कम होगा और शहर की पहचान में एक नया अध्याय जोड़ेगा। साथ ही, यह ब्रिज बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित पूरे नाॅर्थ-ईस्ट से कनेक्टिविटी बढ़ाएगा।













